नमस्ते दोस्तों! आज हम बात करने वाले हैं एक ऐसी जॉब के बारे में जो पूरी तरह से रिमोट है, Part-Time है और भारत में बैठे करने के लिए बिल्कुल परफेक्ट है। यह जॉब एक जर्मनी बेस्ड प्रोफेशनल के लिए Virtual Assistant की है। अगर आप ऑर्गनाइज्ड हैं, कम्युनिकेशन में अच्छे हैं और एक अच्छी साइड इनकम चाहते हैं, तो यह जानकारी आपके काम की हो सकती है। चलिए, सब कुछ डिटेल से समझते हैं, बिल्कुल आम बोलचाल की भाषा में।

जॉब का बेसिक ओवरव्यू (सारांश)
यह जॉब एक “पार्ट-टाइम वर्चुअल असिस्टेंट या कोऑर्डिनेटर” की है। यानी आपको जर्मनी में बैठे एक व्यक्ति की मदद करनी है, जो पुरानी जर्मन प्रिंटिंग और पैकेजिंग मशीनों का व्यापार करते हैं। आपकी जिम्मेदारी होगी भारत और शायद आसपास के देशों में उनके डिस्ट्रीब्यूटर्स (वितरकों) के साथ संपर्क करना और तालमेल बैठाना। यह काम आप घर बैठे, अपने लैपटॉप और फोन से कर सकते हैं। वीक के करीब 20 घंटे काम करना होगा और इसके लिए महीने का ₹10,000 मिलेगा।
जॉब का टाइटल और लोकेशन
- जॉब टाइटल: पार्ट-टाइम वर्चुअल असिस्टेंट / कोऑर्डिनेटर – इंडिया बेस्ड
- लोकेशन: पूरी तरह से रिमोट। आप भारत में कहीं भी बैठ कर यह काम कर सकते हैं – चाहे दिल्ली हो, मुंबई हो, एक छोटा शहर हो या गाँव। बस इंटरनेट कनेक्शन ठीक होना चाहिए।
- एम्प्लॉयमेंट टाइप: पार्ट-टाइम। यह फुल-टाइम जॉब नहीं है। आप दूसरी नौकरी कर रहे हों, पढ़ रहे हों या घर संभाल रहे हों, तब भी आप इसे हैंडल कर सकते हैं।
- काम के घंटे: लगभग 20 घंटे प्रति सप्ताह। मतलब रोजाना औसतन 3-4 घंटे। टाइमिंग फ्लेक्सिबल हो सकती है, लेकिन कभी-कभी जर्मनी के टाइम के हिसाब से कॉल शेड्यूल करने की जरूरत पड़ सकती है।
- सैलरी: ₹10,000 प्रति महीना। पार्ट-टाइम के हिसाब से यह एक स्टैंडर्ड और ठीक-ठाक रकम है।
नौकरी देने वाले के बारे में (About the Hirer)
जो सर जी यह जॉब दे रहे हैं, वे जर्मनी में रहते हैं और उनका बिजनेस है यूज्ड (पुरानी) जर्मन प्रिंटिंग और पैकेजिंग मशीनों का। ये ऐसी बड़ी मशीनें होती हैं जो अखबार, किताबें, कार्टन, दवाई के बक्से आदि छापने और बनाने के काम आती हैं। जर्मनी की मशीनें दुनिया भर में क्वालिटी के लिए मशहूर हैं। इनका काम है इन मशीनों को खरीदना और फिर दूसरे देशों (जैसे भारत, एशिया के अन्य देश) में उन्हें बेचने के लिए डिस्ट्रीब्यूटर्स को ढूंढना या उनके साथ काम करना। चूंकि वे खुद जर्मनी में हैं और यहाँ के डिस्ट्रीब्यूटर्स से सीधे बातचीत करने में टाइम जोन और भाषा की दिक्कत हो सकती है, इसलिए उन्हें भारत में एक कोऑर्डिनेटर की जरूरत है।
आपकी जिम्मेदारियाँ (Responsibilities – आपको क्या करना होगा)
यह जॉब मुख्य तौर पर कम्युनिकेशन और कोऑर्डिनेशन का है। आप एक “कड़ी” (लिंक) का काम करेंगे जर्मनी के बॉस और भारत/एशिया के डिस्ट्रीब्यूटर्स के बीच।
- डिस्ट्रीब्यूटर्स से संपर्क करना: आपको WhatsApp, ईमेल और फोन कॉल के जरिए विभिन्न डिस्ट्रीब्यूटर्स से बात करनी होगी। ये वो लोग/कंपनियाँ हैं जो मशीनें खरीदना चाहते हैं या पहले से बिजनेस कर रहे हैं।
- जानकारी जुटाना: डिस्ट्रीब्यूटर्स से आपको उनकी जरूरतें पूछनी होंगी। जैसे – उन्हें किस तरह की मशीन चाहिए? उनका बजट क्या है? कौन सी मशीन मॉडल उन्हें पसंद है? उन्हें कितनी मशीनें चाहिए?
- मीटिंग शेड्यूल करना: कई बार जटिल बातचीत के लिए जर्मनी ऑफिस और डिस्ट्रीब्यूटर के बीच वीडियो कॉल या ऑनलाइन मीटिंग लगानी पड़ती है। आप उसकी डायरी देखकर उसे शेड्यूल करेंगे।
- रिकॉर्ड रखना: सारी बातचीत, डिस्ट्रीब्यूटर की जरूरतें, बजट आदि का हिसाब आपको Google Sheets या Excel में बनाए रखना होगा। ताकि बॉस को पता रहे कि कहाँ क्या स्टेटस है। यह बहुत जरूरी काम है।
- डॉक्युमेंट शेयर करना: जर्मनी ऑफिस से आपको मशीन के इंस्पेक्शन रिपोर्ट, तस्वीरें, विडियो, टेक्निकल स्पेसिफिकेशन शीट आदि मिलेंगे। आपको इन्हें सही डिस्ट्रीब्यूटर तक पहुँचाना है।
- नियमित अपडेट देना: हफ्ते में या जैसे तय हो, आपको जर्मनी के बॉस को एक अपडेट देना होगा कि किस डिस्ट्रीब्यूटर से बात हुई, क्या रिस्पॉन्स आया, कोई नया लीड मिला कि नहीं, आदि।
आपमें क्या योग्यताएँ होनी चाहिए? (Requirements – जरूरी बातें)
- भारत में रहते हों: यह जॉब खासतौर पर भारत बेस्ड लोगों के लिए है।
- अंग्रेजी में धाराप्रवाह: बोलने और लिखने दोनों में अंग्रेजी अच्छी होनी चाहिए। ज्यादातर कम्युनिकेशन अंग्रेजी में ही होगी – चाहे व्हाट्सएप मैसेज हों, ईमेल हों या फोन कॉल। जर्मनी के बॉस से भी अंग्रेजी में ही बात होगी।
- टेक-सेवी: आपको WhatsApp, ईमेल (जैसे Gmail), और Google Workspace (जैसे Google Sheets, Google Drive) के बेसिक इस्तेमाल आने चाहिए। ये सब आजकल बहुत आसान हैं।
- व्यवस्थित और जिम्मेदार: आपकी वर्क स्टाइल ऑर्गनाइज्ड होनी चाहिए। किससे कब बात हुई, क्या बात हुई, उसे नोट करना और समय पर काम करना जरूरी है। आपको प्रोएक्टिव यानी अपने आप आगे बढ़कर काम करने वाले बनना होगा।
- पहले का अनुभव (एक्स्ट्रा प्लस पॉइंट): अगर आप पहले वर्चुअल असिस्टेंट के तौर पर काम कर चुके हैं, या B2B (बिजनेस-टू-बिजनेस) सेल्स या कोऑर्डिनेशन का अनुभव रखते हैं, तो यह बहुत बड़ा फायदा होगा। लेकिन अगर नहीं है, तो भी कोई बात नहीं, आवेदन कर सकते हैं।
- तकनीकी ज्ञान (बोनस): अगर आपको प्रिंटिंग या पैकेजिंग मशीनों के बारे में थोड़ी भी जानकारी है, तो यह चेरी ऑन द केक जैसा है। लेकिन यह बिल्कुल भी जरूरी नहीं है। आप काम करते-करते सीख जाएंगे।
आवेदन कैसे करें? (How to Apply)
यह प्रक्रिया बहुत आसान है। आपको बस यह करना है:
- अपना रिज्यूमे (बायोडाटा) या अपना लिंक्डइन प्रोफाइल का लिंक तैयार रखें।
- साथ में एक छोटा सा नोट (Cover Letter जैसा) लिखें, जिसमें बताएं कि आपमें यह काम करने की काबिलियत क्यों है। अगर वर्चुअल असिस्टेंट या B2B सपोर्ट का कोई पुराना अनुभव है, तो जरूर बताएं।
- इन दोनों चीजों को जॉब पोस्ट करने वाले व्यक्ति को ईमेल या दिए गए एप्लीकेशन लिंक के जरिए भेज दें।
ध्यान दें: जॉब पोस्टिंग में “Easy Apply” लिखा है, मतलब आवेदन प्रक्रिया जटिल नहीं है।
इस जॉब के फायदे (Advantages)
- वर्क फ्रॉम होम (घर से काम): यात्रा का खर्च और समय बचेगा। आराम से अपने घर के माहौल में काम कर सकते हैं।
- फ्लेक्सिबल टाइमिंग: 20 घंटे प्रति सप्ताह का मतलब आप अपने दूसरे कामों के साथ इसे फिट कर सकते हैं।
- अंतरराष्ट्रीय अनुभव: एक विदेशी (जर्मन) क्लाइंट के साथ काम करने का अनुभव मिलेगा, जो आपके रिज्यूमे को अच्छा बनाता है।
- नया स्किल सेट: आप B2B कम्युनिकेशन, कोऑर्डिनेशन, और इंडस्ट्रियल सेल्स के बारे में सीखेंगे।
- निश्चित आय: पार्ट-टाइम के लिए ₹10,000 का निश्चित स्टाइपेंड एक अच्छी साइड इनकम है।
इस जॉब में चुनौतियाँ क्या हो सकती हैं? (Possible Challenges)
- टाइम जोन अंतर: जर्मनी और भारत के बीच करीब 3.5 से 4.5 घंटे का अंतर होता है (जर्मनी पीछे)। कभी-कभी शाम या रात के समय कॉल शेड्यूल करनी पड़ सकती है।
- तकनीकी शब्दावली: शुरुआत में प्रिंटिंग मशीनों के तकनीकी शब्द (टर्मिनोलॉजी) समझने में थोड़ी दिक्कत हो सकती है, लेकिन समय के साथ आदत हो जाएगी।
- सेल्स प्रेशर नहीं, लेकिन टार्गेट: आपसे सीधे सेल्स तो नहीं माँगी जाएगी, लेकिन ज्यादा से ज्यादा अच्छे डिस्ट्रीब्यूटर्स से संपर्क करने और लीड जनरेट करने की उम्मीद रहेगी।
- सेल्फ-मोटिवेशन: घर से काम करने के लिए खुद को डिसिप्लिन में रखना और प्रोएक्टिव रहना जरूरी है।
जॉब सारांश टेबल (Table Chart)
| पैरामीटर | विवरण |
|---|---|
| जॉब टाइटल | Part-Time Virtual Assistant/ कोऑर्डिनेटर |
| कंपनी/हायरर | जर्मनी-बेस्ड प्रोफेशनल (यूज्ड प्रिंटिंग/पैकेजिंग मशीन्स) |
| लोकेशन | पूरी तरह रिमोट (भारत में कहीं से भी) |
| नौकरी का प्रकार | पार्ट-टाइम |
| काम के घंटे | ~20 घंटे/सप्ताह (लगभग 3-4 घंटे प्रतिदिन) |
| वेतन/सैलरी | ₹10,000 प्रति माह |
| मुख्य जिम्मेदारी | डिस्ट्रीब्यूटर्स के साथ WhatsApp/ईमेल/कॉल पर संपर्क, जानकारी जुटाना, मीटिंग शेड्यूल करना, रिकॉर्ड रखना |
| जरूरी योग्यता | भारत में निवास, अच्छी अंग्रेजी (बोलना/लिखना), WhatsApp, ईमेल, Google Sheets का ज्ञान |
| अनुभव (प्लस पॉइंट) | वर्चुअल असिस्टेंट या B2B कोऑर्डिनेशन का अनुभव |
| बोनस स्किल | प्रिंटिंग/पैकेजिंग मशीनों की बेसिक जानकारी |
| आवेदन प्रक्रिया | रिज्यूमे / लिंक्डइन प्रोफाइल + एक छोटा अनुभव नोट भेजना |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (F&Q)
Q1: क्या मुझे जर्मन भाषा आनी चाहिए?
Ans: बिल्कुल नहीं। सारा काम अंग्रेजी में ही होगा। जर्मनी के बॉस भी अंग्रेजी में ही बात करेंगे।
Q2: क्या यह जॉब पक्की है? ₹10,000 नियमित मिलेंगे?
Ans: जॉब पोस्टिंग ऊपर दिए गए विवरण के आधार पर असली लग रही है। वेतन माह के निश्चित समय पर मिलना चाहिए, यह आपको हायरिंग के समय क्लियर कर लेना चाहिए। किसी भी जॉब के लिए एडवांस पैसे माँगने वाली बात से सावधान रहें।
Q3: मेरा कोई भी अनुभव नहीं है। क्या मैं आवेदन कर सकता हूँ?
Ans: हाँ, कर सकते हैं। अनुभव एक “प्लस पॉइंट” है, मांग नहीं। अगर आपकी अंग्रेजी अच्छी है, आप कंप्यूटर/फोन चलाना जानते हैं और आप सीखने को तैयार हैं, तो अपना रिज्यूमे जरूर भेजें। अपने कवर नोट में अपनी सीखने की ललक और जिम्मेदारी के बारे में जरूर बताएं।
Q4: क्या मुझे रात के समय काम करना पड़ेगा जर्मनी टाइम के हिसाब से?
Ans: ज्यादातर काम भारतीय समय के अनुसार दिन में ही होगा, जैसे डिस्ट्रीब्यूटर्स को ईमेल भेजना, व्हाट्सएप मैसेज करना। हाँ, कभी-कभार अगर जर्मनी ऑफिस और भारतीय डिस्ट्रीब्यूटर के बीच मीटिंग शेड्यूल करनी हो, तो आपको शाम का समय (भारत के हिसाब से) देना पड़ सकता है। लेकिन यह रोज का काम नहीं होगा।
Q5: क्या ट्रेनिंग मिलेगी?
Ans: जॉब डिस्क्रिप्शन में सीधे तौर पर ट्रेनिंग का जिक्र नहीं है, लेकिन ऐसी स्थिति में आमतौर पर हायरर आपको शुरुआत में काम का तरीका, मशीनों के बारे में बेसिक जानकारी और अपने एक्सपेक्टेशन्स बता देते हैं। आप खुद भी पूछ सकते हैं।
Q6: क्या यह सेल्स की नौकरी है? क्या मुझे कमीशन मिलेगा?
Ans: नहीं, यह सीधे तौर पर सेल्स की नौकरी नहीं है। आपका काम है कोऑर्डिनेशन और कम्युनिकेशन। आप सेल्स की प्रक्रिया को सुचारू बनाने का काम करेंगे। सैलरी फिक्स्ड ₹10,000 है, कमीशन का जिक्र नहीं है।
Q7: मुझे Google Sheets आती नहीं है, तो क्या करूँ?
Ans: कोई बात नहीं! Google Sheets सीखना बहुत आसान है। YouTube पर हिंदी में बहुत सारे फ्री ट्यूटोरियल हैं। एक-दो दिन में आप बेसिक रिकॉर्ड रखना सीख सकते हैं। अपनी सीखने की क्षमता को हाइलाइट करें।
Q8: इंटरव्यू कैसे होगा?
Ans: हो सकता है पहला इंटरव्यू व्हाट्सएप ऑडियो कॉल या गूगल मीट वीडियो कॉल पर हो। आपकी अंग्रेजी बोलने की क्षमता और आपके व्यक्तित्व (कम्युनिकेशन स्किल) को चेक किया जाएगा।
Q9: क्या स्टूडेंट्स इस जॉब के लिए अप्लाई कर सकते हैं?
Ans: हाँ, बिल्कुल! पार्ट-टाइम और रिमोट होने के कारण यह जॉब कॉलेज स्टूडेंट्स या हाल ही में ग्रेजुएट हुए युवाओं के लिए भी बहुत अच्छा अवसर है। इससे अनुभव और पैसे दोनों मिलेंगे।
निष्कर्ष (Conclusion)
तो दोस्तों, यह है “Part-Time Virtual Assistant / Coordinator” जॉब की पूरी डिटेल। यह उन लोगों के लिए एक शानदार मौका है जो एक स्टेबल, फ्लेक्सिबल और रिमोट पार्ट-टाइम ऑप्शन तलाश रहे हैं। इसमें आपको एक अंतरराष्ट्रीय क्लाइंट के साथ काम करने का, नए इंडस्ट्रियल सेक्टर के बारे में जानने का और अपनी कम्युनिकेशन स्किल्स को निखारने का मौका मिलेगा।
अगर आपको लगता है कि आप यह जिम्मेदारी निभा सकते हैं, तो देरी न करें। अपना एक अच्छा सा रिज्यूमे बनाएं (अगर नहीं है तो सिंपल वर्ड फाइल में भी बना सकते हैं), एक प्यारा सा इंट्रोडक्शन नोट लिखें और जल्द से जल्द अप्लाई कर दें। याद रखें, “Easy Apply” है, तो मौका गंवाना नहीं है।
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